DESH KO KHOKHLA KAR RAHA NAKSALWAD
देश को खोखला कर रहा नक्सलवाद
नक्सलवाद देश के लिए एक बड़ी समस्या बनकर देश को अंदर ही अंदर खोखला करने में जुटी हुई है। देखा जाए तो नक्सली पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, उड़ीसा, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र , आँध्रप्रदेश से होते हुए अब मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश तक सक्रिय हो गया है। इस प्रकार से इनकी मौजुदगी देश में बढती जा रही है, जो चिंताजनक है।
25 मई को छत्तीसगढ़ के जगदलपूर से 47 किलोमीटर दूर दरभा के झीरमघाट में जो नृशंस हत्या हुई, वह निश्चित तौर से अमानवीय व अलोकतांत्रिक था। इस प्रकार से बड़ी तादाद में एकजुट होकर राजनीतिक पार्टी की रैली के दौरान नेताओं पर हमले का यह पहला मामला है। इससे साफ पता चलता है कि नक्सली पुलिस, सशस्त्र बलों से होते हुए अब नेता भी उनके निशने पर हैं। बीजेपी के भी कई नेता इनके हिट लिस्ट में शामिल है। नक्सली का गोरिल्ला युद्ध में माहिर होने व जंगल के बारे में चप्पे-चप्पे का पता होने की वजह से ये आसानी से घात लगाकर सहस्त्र बलों व अन्य को निशाना बनाते रहते हैं और इस प्रकार कई बार नक्सलियों ने बड़ी घटनाओं को अंजाम दिया है। वहीं इन्हें आदिवासी समुदायों और स्थानीय लोगों के समर्थन होने की वजह से ये आसानी से हमला कर बच निकलते हैं। जिन्हें ढूंढ़ पाने में काफी मशक्कत करना पड़ता है/ सवाल उठता है कि बार-बार इस तरह के वारदात ये क्यूं कर रह रहे हैं इसके पीछे सबसे बड़ी वजह है निरक्षरता, गरीबी और तंगहाली व विषमता से इनका घिरे होना।
इस घटना के बाद देश में बहस हुई कि आखिर नक्सली समस्या से कैसे निजात पाया जाए? कईयों ने कहा कि इनके विकास के लिए विशेष कुछ किया जाए जिससे कि लोग नक्सलवादी से पीछे हटेंगे तो कुछ ने माना कि इस समस्या को दूर करने के लिए सैनिक बल का उपयोग कर इनका खात्मा ही एकमात्र विकल्प है। लेकिन इस बात का नजरअंदाज नहीं करना चाहिए कि नक्सली को केवल स्थानीय लोगों का समर्थन नहीं है बल्कि देश -विदेश के माओवादी व आतंकवादी का काफी सहयोग है। इन्हें हथियार एवं पैसा मुहैया कराकर मजबूत व देश के खिलाफ इस्तेमाल किया जाता रहा है।
ऐसे हालात में नक्सली समस्या को दूर करने के लिए सोच-विचार कर बुद्धिमता से कदम उठाना होगा। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि नक्सली अकेल नहीं बल्कि इन्हें माओवादी, आतंकवादी गुटों व विदेशी ताकतों इनके साथ हैं इसलिए सबसे पहले तो नक्सली के तंत्र को माओवादी, आतंकवादी व विदेशी ताकतों से मुक्त कराना होगा। फिर नक्सली क्षेत्रों में रोजगार मुहैया करके इनके विकास को तेजी से बढ़ाना होगा तब जाकर काफी हद तक हम नक्सली से निजात पा सकेंगे और देश को मजबूत व विकसित बनाया जा सकेगा। किसी भी सूरत में बंदूक की नोक पर नक्सलवाद से निजात नहीं पाया जा सकता।
नक्सलवाद देश के लिए एक बड़ी समस्या बनकर देश को अंदर ही अंदर खोखला करने में जुटी हुई है। देखा जाए तो नक्सली पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, उड़ीसा, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र , आँध्रप्रदेश से होते हुए अब मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश तक सक्रिय हो गया है। इस प्रकार से इनकी मौजुदगी देश में बढती जा रही है, जो चिंताजनक है।
25 मई को छत्तीसगढ़ के जगदलपूर से 47 किलोमीटर दूर दरभा के झीरमघाट में जो नृशंस हत्या हुई, वह निश्चित तौर से अमानवीय व अलोकतांत्रिक था। इस प्रकार से बड़ी तादाद में एकजुट होकर राजनीतिक पार्टी की रैली के दौरान नेताओं पर हमले का यह पहला मामला है। इससे साफ पता चलता है कि नक्सली पुलिस, सशस्त्र बलों से होते हुए अब नेता भी उनके निशने पर हैं। बीजेपी के भी कई नेता इनके हिट लिस्ट में शामिल है। नक्सली का गोरिल्ला युद्ध में माहिर होने व जंगल के बारे में चप्पे-चप्पे का पता होने की वजह से ये आसानी से घात लगाकर सहस्त्र बलों व अन्य को निशाना बनाते रहते हैं और इस प्रकार कई बार नक्सलियों ने बड़ी घटनाओं को अंजाम दिया है। वहीं इन्हें आदिवासी समुदायों और स्थानीय लोगों के समर्थन होने की वजह से ये आसानी से हमला कर बच निकलते हैं। जिन्हें ढूंढ़ पाने में काफी मशक्कत करना पड़ता है/ सवाल उठता है कि बार-बार इस तरह के वारदात ये क्यूं कर रह रहे हैं इसके पीछे सबसे बड़ी वजह है निरक्षरता, गरीबी और तंगहाली व विषमता से इनका घिरे होना।
ऐसे हालात में नक्सली समस्या को दूर करने के लिए सोच-विचार कर बुद्धिमता से कदम उठाना होगा। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि नक्सली अकेल नहीं बल्कि इन्हें माओवादी, आतंकवादी गुटों व विदेशी ताकतों इनके साथ हैं इसलिए सबसे पहले तो नक्सली के तंत्र को माओवादी, आतंकवादी व विदेशी ताकतों से मुक्त कराना होगा। फिर नक्सली क्षेत्रों में रोजगार मुहैया करके इनके विकास को तेजी से बढ़ाना होगा तब जाकर काफी हद तक हम नक्सली से निजात पा सकेंगे और देश को मजबूत व विकसित बनाया जा सकेगा। किसी भी सूरत में बंदूक की नोक पर नक्सलवाद से निजात नहीं पाया जा सकता।
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